Aal-i-Imraan 3:70
آل عمرانيَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ لِمَ تَكْفُرُونَ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ وَأَنتُمْ تَشْهَدُونَ
ऐ अह्ले किताब! तुम क्यों अल्लाह की आयतों[34] का इनकार करते हो, जबकि तुम खुद गवाही देते[35] हो?
[34] जो तुम्हारी किताब में अंतिम नबी से संबंधित हैं।
[35] अर्थात उन आयतों के सत्य होने के साक्षी हो।
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
ऐ किताब वाले यहूदियो और ईसाइयो! तुम अल्लाह की उन आयतों का इनकार क्यों करते हो, जो तुमपर उतारी गई हैं और जो उनमें मुहम्मद - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम - की नुबुव्वत का सबूत है, जबकि तुम इस बात के गवाह हो कि वह (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का ईश्दूत होना) सत्य है, जिसका तुम्हारी किताबों में प्रमाण है?!
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net