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सूरह 3 · आयत 64

Aal-i-Imraan 3:64

آل عمران

قُلْ يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ تَعَالَوْا۟ إِلَىٰ كَلِمَةٍ سَوَآءٍۭ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَلَّا نَعْبُدَ إِلَّا ٱللَّهَ وَلَا نُشْرِكَ بِهِۦ شَيْـًٔا وَلَا يَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا أَرْبَابًا مِّن دُونِ ٱللَّهِ ۚ فَإِن تَوَلَّوْا۟ فَقُولُوا۟ ٱشْهَدُوا۟ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ

मतलब

(ऐ नबी!) कह दीजिए : ऐ किताब वालो! आओ एक ऐसी बात की ओर जो हमारे बीच और तुम्हारे बीच समान (बराबर) है; यह कि हम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करें और उसके साथ किसी चीज़ को साझी न बनाएँ तथा हममें से कोई किसी को अल्लाह के सिवा रब न बनाए। फिर यदि वे मुँह फेर लें, तो कह दो कि तुम गवाह रहो कि हम (अल्लाह के) आज्ञाकारी[29] हैं।

[29] इस आयत में ईसा अलैहिस्सलाम से संबंधित विवाद के निवारण के लिए एक दूसरी विधि बताई गई है।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) आप कह दें : ऐ किताब वाले यहूदियो और ईसाइयो! आओ, हम न्याय की एक ऐसी बात पर एकजुट हों, जिसमें हम सभी समान हैं : कि हम अकेले अल्लाह की इबादत करें। इसलिए हम उसके साथ उसके अलावा किसी और की इबादत न करें, चाहे उसका पद कितना ही बड़ा और उसका स्थान कितना ही ऊँचा हो। और हम एक दूसरे को रब न बनाएँ, जिनकी अल्लाह के सिवा पूजा की जाए और उनका आज्ञापालन किया जाए। यदि वे सत्य और न्याय की उस बात से मुँह मोड़ लें, जिसकी ओर आप उन्हें बुलाते हैं, तो (ऐ ईमान वालो!) तुम उनसे कह दो : तुम लोग गवाह रहो की हम अल्लाह के प्रति समर्पित और उसकी आज्ञा का पालन करने वाले हैं।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Aal-i-Imraan

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net