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सूरह 3 · आयत 28

Aal-i-Imraan 3:28

آل عمران

لَّا يَتَّخِذِ ٱلْمُؤْمِنُونَ ٱلْكَـٰفِرِينَ أَوْلِيَآءَ مِن دُونِ ٱلْمُؤْمِنِينَ ۖ وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ فَلَيْسَ مِنَ ٱللَّهِ فِى شَىْءٍ إِلَّآ أَن تَتَّقُوا۟ مِنْهُمْ تُقَىٰةً ۗ وَيُحَذِّرُكُمُ ٱللَّهُ نَفْسَهُۥ ۗ وَإِلَى ٱللَّهِ ٱلْمَصِيرُ

मतलब

ईमान वालों को चाहिए कि वे मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को मित्र न बनाएँ और जो ऐसा करेगा, उसका अल्लाह से कोई संबंध नहीं। परंतु यह कि तुम उनसे अपना बचाव[13] करो, और अल्लाह तुम्हें अपने आपसे डराता है और अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है।

[13] अर्थात संधि मित्र बना सकते हो।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

ऐ ईमान वालो! तुम काफ़िरों को मित्र (सहयोगी) न बनाओ कि मोमिनों को छोड़कर उनसे प्रेम करो और उनका समर्थन करो। और जो ऐसा करेगा, वह अल्लाह से बरी हो गया और अल्लाह उससे बरी हो गया। परंतु अगर तुम उनके प्रभुत्व में हो और तुम्हें उनसे अपने आपपर डर महसूस हो, तो ऐसी परिस्थिति में उनके प्रति (दिल में) शत्रुता रखते हुए बातचीत में कोमलता और कार्यों में दया दिखाकर, उनके कष्ट से बचाव करने में कुछ भी गलत नहीं है, तथा अल्लाह तुम्हें अपने आपसे डराता है, इसलिए उससे डरो, और अवज्ञा करके उसके क्रोध का शिकार न बनो। तथा क़ियामत के दिन सभी बंदों को अकेले अल्लाह ही की ओर लौटना है, ताकि उन्हें उनके कामों का बदला मिले।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Aal-i-Imraan

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net