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सूरह 27 · आयत 3

An-Naml 27:3

النمل

ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُم بِٱلْـَٔاخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ

मतलब

जो नमाज़ स्थापित करते तथा ज़कात देते हैं और वही हैं, जो आख़िरत (परलोक) पर विश्वास रखते हैं।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

जो पूर्णतम तरीक़े से नमाज़ अदा करते हैं, अपने माल की ज़कात निकाल कर उसके हक़दारों को देते हैं, तथा वे आख़िरत के सवाब और सज़ा पर विश्वास रखते हैं।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

An-Naml

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net