An-Noor 24:40
النورأَوْ كَظُلُمَـٰتٍ فِى بَحْرٍ لُّجِّىٍّ يَغْشَىٰهُ مَوْجٌ مِّن فَوْقِهِۦ مَوْجٌ مِّن فَوْقِهِۦ سَحَابٌ ۚ ظُلُمَـٰتٌۢ بَعْضُهَا فَوْقَ بَعْضٍ إِذَآ أَخْرَجَ يَدَهُۥ لَمْ يَكَدْ يَرَىٰهَا ۗ وَمَن لَّمْ يَجْعَلِ ٱللَّهُ لَهُۥ نُورًا فَمَا لَهُۥ مِن نُّورٍ
अथवा (उनके कर्म) उन अँधेरों के समान हैं, जो अत्यंत गहरे सागर में हों, जिसे एक लहर ढाँप रही हो, जिसके ऊपर एक और लहर हो, जिसके ऊपर एक बादल हो, कई अँधेरे हों, जिनमें से कुछ, कुछ के ऊपर हों। जब (इन अँधेरों में फँसा हुआ व्यक्ति) अपना हाथ निकाले, तो क़रीब नहीं कि उसे देख पाए। और वह व्यक्ति जिसके लिए अल्लाह प्रकाश न बनाए, तो उसके लिए कोई भी प्रकाश[35] नहीं।
[35] अर्थात काफ़िर, अविश्वास और कुकर्मों के अंधकार में घिरा रहता है। और ये अंधकार उसे मार्गदर्शन की ओर नहीं आने देते।
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
या उनके कर्म एक गहरे सागर में अँधेरों की तरह हैं, जिस (सागर) के ऊपर एक लहर हो, उस लहर के ऊपर एक और लहर हो, (तथा) उसके ऊपर बादल हो, जो तारों को ढाँप ले, जिनसे वह मार्ग पा सकता है। इस तरह, परत दर परत अंधेरे हों। इन अंधेरों में पड़ा हुआ इनसान अगर अपना हाथ निकाले, तो अँधेरे की तीव्रता के कारण शायद ही वह उसे देख सके। यही हाल काफ़िर का है। उसपर अज्ञानता, संदेह, भ्रम तथा हृदय पर मुहर के अँधेरे परत-दर-परत जमे हुए हैं। और जिसे अल्लाह गुमराही से निकालकर मार्गदर्शन और अपनी किताब का ज्ञान न प्रदान करे, तो उसके पास कोई मार्गदर्शन नहीं है, जिसके द्वारा वह मार्ग पा सके, और न ही कोई पुस्तक है, जिसके द्वारा वह प्रकाश प्राप्त कर सके।
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net