Al-Hajj 22:73
الحجيَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ضُرِبَ مَثَلٌ فَٱسْتَمِعُوا۟ لَهُۥٓ ۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ لَن يَخْلُقُوا۟ ذُبَابًا وَلَوِ ٱجْتَمَعُوا۟ لَهُۥ ۖ وَإِن يَسْلُبْهُمُ ٱلذُّبَابُ شَيْـًٔا لَّا يَسْتَنقِذُوهُ مِنْهُ ۚ ضَعُفَ ٱلطَّالِبُ وَٱلْمَطْلُوبُ
ऐ लोगो! एक उदाहरण दिया गया है। इसे ध्यान से सुनो। निःसंदेह वे लोग जिन्हें तुम अल्लाह के अतिरिक्त पुकारते हो, कभी एक मक्खी भी पैदा नहीं करेंगे, यद्यपि वे इसके लिए इकट्ठे हो जाएँ। और यदि मक्खी उनसे कोई चीज़ छीन ले, वे उसे उससे छुड़ा नहीं पाएँगे। कमज़ोर है माँगने वाला और वह भी जिससे माँगा गया।
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
ऐ लोगो! एक उदाहरण दिया जा रहा है, इसे ध्यान से सुनो और सीख ग्रहण करो। तुम अल्लाह के सिवा जिन मूर्तियों तथा अन्य वस्तुओं को पूजते हो, वे अपनी विवशता के कारण कभी एक मक्खी जैसी छोटी-सी चीज़ भी पैदा नहीं करेंगे। बल्कि अगर वे उसे पैदा करने के लिए सबके सब इकट्ठे हो जाएँ, तब भी उसे पैदा नहीं कर पाएँगे। और यदि मक्खी उनके पास मौजूद खुशबू या कोई और चीज़ ले उड़े, तो वे मक्खी से उसे छुड़ा नहीं सकते। इनके मक्खी को पैदा करने और उससे अपनी चीज़ों को छुड़ाने में असमर्थता से; यह स्पष्ट हो गया कि वे इससे बड़ा कुछ करने में असमर्थ हैं, फिर तुम - इनकी लाचारी के बावजूद - अल्लाह के सिवा इनकी पूजा कैसे करते हो?! कमज़ोर है यह तालिब, अर्थात् वह पूजी जाने वाली मूर्ति जो मक्खी से अपनी छीनी हुई चीज़ भी छुड़ा नहीं सकती, और कमज़ोर है यह मतलूब अर्थात् मक्खी।
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net