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सूरह 17 · आयत 78

Al-Israa 17:78

الإسراء

أَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ لِدُلُوكِ ٱلشَّمْسِ إِلَىٰ غَسَقِ ٱلَّيْلِ وَقُرْءَانَ ٱلْفَجْرِ ۖ إِنَّ قُرْءَانَ ٱلْفَجْرِ كَانَ مَشْهُودًا

मतलब

सूर्य के ढलने से रात के अँधेरे[47] तक नमाज़ क़ायम करें, तथा फ़ज्र की नमाज़ भी (क़ायम करें)। निःसंदेह फ़ज्र की नमाज़ (फ़रिश्तों की) उपस्थिति[48] का समय है।

[47] अर्थात ज़ुहर, अस्र और मग्रिब तथा इशा की नमाज़।
[48] अर्थात फ़ज्र की नमाज़ के समय रात और दिन के फ़रिश्ते एकत्र तथा उपस्थित रहते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारी : 359, सह़ीह़ मुस्लिम : 632)

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

नमाज़ स्थापित करें, इस प्रकार कि उसे सबसे पूर्ण तरीक़े से उसके नियत समय पर अदा करें; आकाश के बीच से सूर्य के ढलने से, जिसमें ज़ुहर और अस्र की नमाज़ें शामिल हैं, रात के अंधेरे तक, जिसमें मग़रिब और इशा की नमाज़ें शामिल हैं। तथा फ़ज्र की नमाज़ क़ायम करें और उसमें क़ुरआन की तिलावत लंबी करें। क्योंकि फ़ज्र की नमाज़ में रात और दिन के फ़रिश्ते उपस्थित होते हैं।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Al-Israa

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net