An-Nahl 16:71
النحلوَٱللَّهُ فَضَّلَ بَعْضَكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ فِى ٱلرِّزْقِ ۚ فَمَا ٱلَّذِينَ فُضِّلُوا۟ بِرَآدِّى رِزْقِهِمْ عَلَىٰ مَا مَلَكَتْ أَيْمَـٰنُهُمْ فَهُمْ فِيهِ سَوَآءٌ ۚ أَفَبِنِعْمَةِ ٱللَّهِ يَجْحَدُونَ
और अल्लाह ने तुममें से कुछ को, कुछ पर जीविका में श्रेष्ठता प्रदान की है। तो वे लोग जिन्हें श्रेष्ठता प्रदान की गई है, किसी तरह अपनी जीविका अपने दासों की ओर फेरने वाले नहीं कि वे उसमें बराबर हो जाएँ। तो क्या वे अल्लाह के उपकारों का इनकार करते हैं?[27]
[27] आयत का भावार्थ यह है कि जब वे स्वयं अपने दासों को अपने बराबर करने के लिए तैयार नहीं हैं, तो फिर अल्लाह की उत्पत्ति और उसके दासों को कैसे पूजा-अर्चना में उसके बराबर करते हैं? क्या यह अल्लाह के उपकारों का इनकार नहीं है?
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
अल्लाह ने तुम्हें जो रोज़ी दी है, उसमें कुछ को दूसरों पर श्रेष्ठता प्रदान की है। इसलिए तुममें से किसी को धनी तो किसी को निर्धन, किसी को राजा तो किसी को प्रजा बनाया है। तो जिन्हें अल्लाह ने रोज़ी के मामले में आगे रखा है, वे अल्लाह के दिए हुए धन को अपने दासों के हवाले करने वाले नहीं हैं ताकि वे राज्य में उनके साथ समान भागीदार हो सकें। तो भला वे कैसे पसंद करते हैं कि अल्लाह के उसके बंदों में से कोई साझी हों, जबकि उन्हें खुद अपने बारे में यह पसंद नहीं कि उनके दासों में से उनके कोई साझी हों जो उनके साथ बराबर हों? भला यह कैसा अन्याय है? और अल्लाह की नेमतों का इससे बड़ा इनकार और क्या हो सकता है?
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net