Ibrahim 14:21
ابراهيموَبَرَزُوا۟ لِلَّهِ جَمِيعًا فَقَالَ ٱلضُّعَفَـٰٓؤُا۟ لِلَّذِينَ ٱسْتَكْبَرُوٓا۟ إِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ أَنتُم مُّغْنُونَ عَنَّا مِنْ عَذَابِ ٱللَّهِ مِن شَىْءٍ ۚ قَالُوا۟ لَوْ هَدَىٰنَا ٱللَّهُ لَهَدَيْنَـٰكُمْ ۖ سَوَآءٌ عَلَيْنَآ أَجَزِعْنَآ أَمْ صَبَرْنَا مَا لَنَا مِن مَّحِيصٍ
और वे सब के सब अल्लाह के सामने पेश[7] होंगे, तो कमज़ोर लोग उन लोगों से कहेंगे, जो बड़े बने हुए थे : निःसंदेह हम तुम्हारे अनुयायी थे, तो क्या तुम हमें अल्लाह की यातना से बचाने में कुछ भी काम आने वाले हो? वे कहेंगे : यदि अल्लाह ने हमें मार्ग दिखाया होता, तो हम तुम्हें अवश्य मार्ग दिखाते। अब हमारे लिए बराबर है कि हम व्याकुल हों, या हम धैर्य से काम लें। हमारे लिए भागने की कोई जगह नहीं है।
[7] अर्थात प्रलय के दिन अपनी समाधियों से निकलकर।
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
नियत समय के दिन लोग अपनी क़ब्रों से उठकर अल्लाह के सामने उपस्थित होंगे। उस समय कमज़ोर अनुयायी अपने सरदारों से कहेंगे : (ऐ सरदारो!) हम तुम्हारे अनुयायी थे। तुम्हारे आदेश का पानल करते और तुम्हारे मना किए हुए कार्य से दूर रहते थे। तो क्या तुम हमें अल्लाह की यातना से कुछ भी बचा सकते हो? तो उनके सरदार करेंगे : यदि अल्लाह ने हमें हिदायत की तौफ़ीक़ प्रदान की होती, तो हम तुम्हें अवश्य उसका मार्ग दिखाते। फिर हम सभी उसकी यातना से बच जाते। लेकिन हम गुमराह हो गए, तो हमने तुम्हें भी गुमराह कर दिया। अब हमारे और तुम्हारे लिए बराबर है कि हम यातना सहन करने सो कमज़ोर हो जाएँ या धैर्य से काम लें। हमारे लिए यातना से भागने की कोई जगह नहीं है।
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net