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सूरह 13 · आयत 31

Ar-Ra'd 13:31

الرعد

وَلَوْ أَنَّ قُرْءَانًا سُيِّرَتْ بِهِ ٱلْجِبَالُ أَوْ قُطِّعَتْ بِهِ ٱلْأَرْضُ أَوْ كُلِّمَ بِهِ ٱلْمَوْتَىٰ ۗ بَل لِّلَّهِ ٱلْأَمْرُ جَمِيعًا ۗ أَفَلَمْ يَا۟يْـَٔسِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَن لَّوْ يَشَآءُ ٱللَّهُ لَهَدَى ٱلنَّاسَ جَمِيعًا ۗ وَلَا يَزَالُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ تُصِيبُهُم بِمَا صَنَعُوا۟ قَارِعَةٌ أَوْ تَحُلُّ قَرِيبًا مِّن دَارِهِمْ حَتَّىٰ يَأْتِىَ وَعْدُ ٱللَّهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُخْلِفُ ٱلْمِيعَادَ

मतलब

और यदि निश्चय कोई ऐसा क़ुरआन होता जिसके द्वारा पहाड़ चलाए[14] जाते, या उसके द्वारा धरती खंड-खंड कर दी जाती, या उसके द्वारा मुर्दों से बात की जाती (तो भी वे ईमान नहीं लाते)। बल्कि सारे का सारा काम अल्लाह ही के अधिकार में है। तो क्या जो लोग ईमान लाए हैं, निराश नहीं हुए कि यदि अल्लाह चाहे, तो निश्चय सब के सब लोगों को सीधी राह पर कर दे! और वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, हमेशा इस हाल में रहेंगे कि उन्हें उनकी करतूतों के कारण कोई न कोई आपदा पहुँचती रहेगी, अथवा उनके घर के निकट उतरती रेहगी, यहाँ तक कि अल्लाह का वादा[15] आ जाए। निःसंदेह अल्लाह अपने वादे के विरुद्ध नहीं करता।

[14] मक्का के काफ़िर आपसे यह माँग करते थे कि यदि आप नबी हैं, तो हमारे बाप-दादा को जीवित कर दें। ताकि हम उनसे बात करें। या मक्का के पर्वतों को खिसका दें। कुछ मुसलमानों के दिलों में भी यह इच्छा हुई कि ऐसा हो जाता है, तो संभव है कि वे ईमान ले आएँ। उसी पर यह आयत उतरी। (देखिए : फ़त्ह़ुल बयान, भाष्य सूरतुर-रा'द)
[15] वादा से अभिप्राय प्रलय के आने का वादा है।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

यदि ईश्वरीय किताबों में से किसी किताब की यह विशेषता होती कि उसके द्वारा पहाड़ों को उनके स्थानों से हटा दिया जाता, या उसके द्वारा धरती को फाड़ दिया जाता और वह नदियों और जल-स्रोतों में बदल जाती, या उसे मुर्दों पर पढ़ा जाता और वे जीवित हो जाते - तो वह अवश्य (ऐ रसूल!) आप पर अवतरित किया गया यह क़ुरआन होता। क्योंकि यह किताब स्पष्ट प्रमाण वाली और महान प्रभाव वाली है, यदि वे साफ़-सुथरे हृदय के मालिक होते, लेकिन वे इनकार करने वाले हैं। बल्कि चमत्कारों आदि के उतारने का सारा काम अल्लाह के अधिकार में हैं। तो क्या अल्लाह पर ईमान रखने वालों ने नहीं जाना कि यदि अल्लाह चमत्कार उतारे बिना ही समस्त लोगों को हिदायत देना चाहता, तो अवश्य उन्हें उसके बिना ही हिदायत दे देता? लेकिन उसने ऐसा नहीं चाहा। तथा अल्लाह का इनकार करने वालों पर उनके कुफ़्र तथा पापों के कारण हमेशा कोई सख़्त आपदा आती रहेगी, जो उनकी शांति भंग कर देगी, या वह आपदा उनके घर के निकट उतरेगी, यहाँ तक कि निरंतर यातना उतरने का अल्लाह का वादा आ जाए। निश्चय अल्लाह अपने वादे को पूरा करना नहीं छोड़ता है, जब उसका नियत समय आ जाए।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Ar-Ra'd

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net