Ar-Ra'd 13:14
الرعدلَهُۥ دَعْوَةُ ٱلْحَقِّ ۖ وَٱلَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسْتَجِيبُونَ لَهُم بِشَىْءٍ إِلَّا كَبَـٰسِطِ كَفَّيْهِ إِلَى ٱلْمَآءِ لِيَبْلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَـٰلِغِهِۦ ۚ وَمَا دُعَآءُ ٱلْكَـٰفِرِينَ إِلَّا فِى ضَلَـٰلٍ
उसी को पुकारना सत्य है। और जिनको वे उसके सिवा पुकारते हैं, वे उनकी प्रार्थना कुछ भी स्वीकार नहीं करते, परंतु उस व्यक्ति की तरह जो अपनी दोनों हथेलियाँ पानी की ओर फैलाने वाला है, ताकि वह उसके मुँह तक पहुँच जाए, हालाँकि वह उस तक हरगिज़ पहुँचने वाला नहीं। और काफ़िरों की पुकार पूर्णतः व्यर्थ (निष्फल) है।
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
केवल अल्लाह ही के लिए तौह़ीद (एकेश्वरवाद) की पुकार है, जिसमें उसका कोई साझी नहीं है। और जिन मूर्तियों को मुश्रिक लोग अल्लाह को छोड़कर पुकारते हैं, वे किसी भी मामले में उन्हें पुकारने वाले की पुकार का जवाब नहीं देतीं। उनका उन मूर्तियों को पुकारना एक प्यासे की तरह है, जो पानी की ओर अपना हाथ फैलाता है, ताकि वह उसके मुँह तक पहुँच जाए और वह उसे पी ले। हालाँकि पानी उसके मुँह तक कभी भी पहुँचने वाला नहीं। दरअसल काफ़िरों का अपनी मूर्तियों को पुकारना व्यर्थ है और सही से दूर है। क्योंकि वे उन्हें न कोई लाभ पहुँचा सकती हैं और न कोई हानि दूर कर सकती हैं।
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net