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सूरह 12 · आयत 53

Yusuf 12:53

يوسف

وَمَآ أُبَرِّئُ نَفْسِىٓ ۚ إِنَّ ٱلنَّفْسَ لَأَمَّارَةٌۢ بِٱلسُّوٓءِ إِلَّا مَا رَحِمَ رَبِّىٓ ۚ إِنَّ رَبِّى غَفُورٌ رَّحِيمٌ

मतलब

और मैं खुद को बरी नहीं करती, निःसंदेह मन तो बुराई का बहुत आदेश देने वाला है, सिवाय उसके जिसपर मेरा पालनहार दया करे। निःसंदेह मेरा पालनहार अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

और अज़ीज़ की स्त्री ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा : मैं खुद को बुराई की इच्छा से पाक नहीं ठहराती और न इससे मेरा उद्देश्य अपनी पवित्रता साबित करना था। क्योंकि इनसान के मन का मामला यह है कि वह इच्छाओं की ओर झुकाव रखने और उनसे बचना कठिन होने के कारण, बुराई का बहुत ज़्यादा आदेश देने वाला है। सिवाय उसके जिसपर अल्लाह दया करे और उसे बुराई का आदेश देने से सुरक्षित रखे। निश्चय मेरा पालनहार अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला और उनपर दया करने वाला है।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Yusuf

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net