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सूरह 12 · आयत 51

Yusuf 12:51

يوسف

قَالَ مَا خَطْبُكُنَّ إِذْ رَٰوَدتُّنَّ يُوسُفَ عَن نَّفْسِهِۦ ۚ قُلْنَ حَـٰشَ لِلَّهِ مَا عَلِمْنَا عَلَيْهِ مِن سُوٓءٍ ۚ قَالَتِ ٱمْرَأَتُ ٱلْعَزِيزِ ٱلْـَٔـٰنَ حَصْحَصَ ٱلْحَقُّ أَنَا۠ رَٰوَدتُّهُۥ عَن نَّفْسِهِۦ وَإِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

मतलब

राजा ने (उन स्त्रियों से) पूछा : तुम्हारा क्या मामला था, जब तुमने यूसुफ़ के मन को रिझाया था? उन्होंने कहा : अल्लाह की पनाह! हमने उसमें कोई बुराई नहीं देखी। तब अज़ीज़ की पत्नी बोल उठी : अब सत्य खूब उजागर हो गया। मैंने ही उसके मन को रिझाया था और निःसंदेह वह सच्चा में से है।[15]

[15] यह क़ुरआन का बड़ा उपकार है कि उसने रसूलों तथा नबियों पर लगाए गए बहुत-से आरोपों का निवारण कर दिया है, जिसे अह्ले किताब (यहूदी तथा ईसाई) ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के विषय में बहुत सी निर्मूल बातें गढ़ ली थीं, जिनको क़ुरआन ने आकर साफ़ कर दिया।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com

तफ़सीर

राजा ने स्त्रियों को संबोधित करते हुए कहा : उस समय तुम्हारा क्या मामला था, जब तुमने छल के द्वारा यूसुफ़ को अपने साथ कुकर्म करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की थी? स्त्रियों ने राजा के जवाब में कहा : अल्लाह न करे कि यूसुफ़ पर आरोप लगाया जाए, अल्लाह की क़सम! हमने उसमें कोई बुराई नहीं देखी। इसपर अज़ीज़ की पत्नी ने जो कुछ किया था, उसको स्वीकारते हुए कहा : अब सच्चाई सामने आ गई है, मैंने ही उसे बहकाने की कोशिश की थी, उसने मुझे फुसलाने की कोशिश नहीं की। निःसंदेह उसने मेरे लगाए हुए आरोप से निर्दोष होने का जो दावा किया है, उसमें वह बिल्कुल सच्चा है।

यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com

Yusuf

अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net