क़दम-ब-क़दम
नमाज़-ए-जनाज़ा
स्रोत: नमाज़-ए-जनाज़ा · मस्जिद का पोस्टर
इल्मी जाँच: अभी बाक़ी है
यह टेक्स्ट सबील की प्रिंट लाइब्रेरी से लिया गया है। इसकी इल्मी जाँच अभी जारी है; जब दो उलमा इस पर दस्तख़त कर देंगे, तब हर चीज़ के साथ उसकी जाँच करने वालों के नाम और तारीख़ दर्ज होगी।
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01
हाथ उठाएँ, तकबीर कहें, फिर अल-फ़ातिहा पढ़ें
اللَّهُ أَكْبَرُ
अल्लाहु अक्बर
आहिस्ता पढ़ी जाती है। कुछ लोग इसके बाद एक छोटा हिस्सा और पढ़ते हैं।
बुख़ारी · सहीह
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- 01
हाथ उठाएँ, तकबीर कहें, फिर अल-फ़ातिहा पढ़ें
اللَّهُ أَكْبَرُअल्लाहु अक्बरआहिस्ता पढ़ी जाती है। कुछ लोग इसके बाद एक छोटा हिस्सा और पढ़ते हैं।बुख़ारी · सहीह - 02
तकबीर, फिर नबी ﷺ पर दुरूद
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ. اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌअल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैत अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम, इन्नक हमीदुन मजीद. अल्लाहुम्म बारिक अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद, कमा बारक्त अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम, इन्नक हमीदुन मजीदAllāhumma ṣalli ‘alā Muḥammadin wa ‘alā āli Muḥammad, kamā ṣallayta ‘alā Ibrāhīma wa ‘alā āli Ibrāhīm, innaka Ḥamīdun Majīd. Allāhumma bārik ‘alā Muḥammadin wa ‘alā āli Muḥammad, kamā bārakta ‘alā Ibrāhīma wa ‘alā āli Ibrāhīm, innaka Ḥamīdun Majīdऐ अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद की आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम पर और इब्राहीम की आल पर रहमत नाज़िल फ़रमाई — बेशक तू तारीफ़ के लायक़, बुज़ुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद की आल पर बरकत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम पर और इब्राहीम की आल पर बरकत नाज़िल फ़रमाई — बेशक तू तारीफ़ के लायक़, बुज़ुर्गी वाला है।पूरा पाठ दिखाया गया है, नमाज़ों के अज़कार से। छपे संस्करण में यह छोटा है।
वही अल्फ़ाज़ जो हर नमाज़ के तशह्हुद में कहे जाते हैं। - 03
तकबीर, फिर मय्यत के लिए दुआ करें
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ، وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ، وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ، وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ، وَاغْسِلْهُ بِالْمَاءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ، وَنَقِّهِ مِنَ الْخَطَايَا كَمَا يُنَقَّى الثَّوْبُ الْأَبْيَضُ مِنَ الدَّنَسِअल्लाहुम्म-ग़्फ़िर लहु व-र्हम्ह, व आफ़िहि व-अफ़ु अन्ह, व अक्रिम नुज़ुलह, व वस्सिअ मुद्ख़लह, व-ग़्सिल्हु बिल-माइ वस-सल्जि वल-बरद, व नक़्क़िहि मिनल-ख़ताया कमा युनक़्क़स-सौबुल-अब्यज़ु मिनद-दनसऐ अल्लाह, उसे बख़्श दे और उस पर रहम फ़रमा, उसे आफ़ियत दे और उसे माफ़ कर दे, उसकी मेहमानी इज़्ज़त के साथ कर, उसके दाख़िल होने की जगह कुशादा कर दे, उसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धो दे, और उसे गुनाहों से ऐसे पाक कर दे जैसे सफ़ेद कपड़ा मैल से पाक किया जाता है। औरत के लिए लहु की जगह लहा; एक से ज़्यादा के लिए लहुम।मुस्लिम · सहीह। यही इस नमाज़ का दिल है — पूरा क़ियाम इसी दुआ के लिए है। - 04
तकबीर, थोड़ा-सा ठहराव, फिर सलाम
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِअस-सलामु अलैकुम व रह्मतुल्लाहदाईं तरफ़ फेरा जाता है, और बाईं तरफ़। नमाज़ पूरी हो गई। - 05
उस बच्चे के लिए जो बुलूग़त को न पहुँचा हो
اللَّهُمَّ اجْعَلْهُ فَرَطًا وَذُخْرًا لِوَالِدَيْهِ، وَشَفِيعًا مُجَابًاअल्लाहुम्म-जअल्हु फ़रतन व ज़ुख़्रन लिवालिदैह, व शफ़ीअन मुजाबनAllāhumma-j‘alhu faraṭan wa dhukhran li-wālidayh, wa shafī‘an mujābanऐ अल्लाह, इसे अपने माँ-बाप के लिए आगे जाने वाला और ज़ख़ीरा बना दे, और ऐसा सिफ़ारिश करने वाला जिसकी सिफ़ारिश क़बूल की जाए।पूरा पाठ दिखाया गया है, जनाज़ा से। छपे संस्करण में यह छोटा है।
ऐ अल्लाह, इसे अपने माँ-बाप के लिए आगे जाने वाला और ज़ख़ीरा बना दे। जिस पर कोई गुनाह नहीं, उसके लिए मग़फ़िरत नहीं माँगी जाती। - 06
क़ब्र के पास
بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَىٰ سُنَّةِ رَسُولِ اللَّهِबिस्मिल्लाहि व अला सुन्नति रसूलिल्लाहमय्यत को उतारते वक़्त कहा जाता है, जिसे दाईं करवट पर क़िबला-रुख़ लिटाया जाता है। हर हाज़िर शख़्स की तरफ़ से तीन लप मिट्टी। फिर कुछ देर ठहरें और उसके लिए मग़फ़िरत माँगें — इस वक़्त उससे सवाल किया जा रहा है।अबू दाऊद · सहीह - 07
अगर आप दफ़न के बाद पहुँचें
नमाज़ नहीं छूटी। वह ख़ुद क़ब्र पर पढ़ी जाती है, उन्हीं चार तकबीरों के साथ, खड़े होकर — जैसे आप ﷺ ने उस औरत पर नमाज़ पढ़ी जो मस्जिद में झाड़ू दिया करती थी, जब लोगों ने उसे रात में दफ़न कर दिया था और आपको ख़बर नहीं दी थी।जिसे नमाज़ के बिना दफ़न कर दिया गया, उसका हक़ उस पर है जिसे इसका इल्म हो जाए। यह दफ़न के बाद एक महीने तक क़ब्र पर पढ़ी जाती है, और कुछ लोग इससे ज़्यादा मुद्दत की भी इजाज़त देते हैं।बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह - 08
ग़ायबाना नमाज़-ए-जनाज़ा — उसके लिए जिसकी मौत कहीं और हुई हो
जब किसी मुसलमान की मौत ऐसी सरज़मीन में हो जहाँ किसी ने उस पर नमाज़ न पढ़ी हो, तो उस पर ग़ायबाना नमाज़ पढ़ी जाती है, क़िबला-रुख़ होकर, उन्हीं चार तकबीरों के साथ — जैसे आप ﷺ ने नजाशी पर उस दिन नमाज़ पढ़ी जिस दिन हब्शा में उनकी वफ़ात हुई।जहाँ उस सरज़मीन में, जिसमें उसकी मौत हुई, नमाज़-ए-जनाज़ा पहले ही पढ़ी जा चुकी हो, वहाँ उलमा का इख़्तिलाफ़ है; ज़्यादा एहतियात वाला अमल यह है कि उसे दोहराने के बजाय उसके लिए दुआ की जाए।यह मस्जिद में या दफ़न की जगह पर पढ़ी जाती है। इसके लिए कोई वक़्त मुक़र्रर नहीं, और बड़ी जमाअत जमा करने के लिए इसमें देर नहीं की जाती।बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह - जो किसी जनाज़े की नमाज़ पढ़े उसके लिए एक क़ीरात है, और जो दफ़न तक ठहरे उसके लिए दो — हर एक उहुद पहाड़ के बराबर।बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह