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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 962

नंबर 962किताब 9, नंबर 156
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ، عَنْ فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَدَّهِنُ بِالزَّيْتِ وَهُوَ مُحْرِمٌ غَيْرَ الْمُقَتَّتِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى الْمُقَتَّتُ الْمُطَيَّبُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ ‏.‏ وَقَدْ تَكَلَّمَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ فِي فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ وَرَوَى عَنْهُ النَّاسُ ‏.‏
Ibn Umar narrated:"The Prophet would apply oil that is not scented (Ghair Muqattat) while he was a Muhrim
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।