सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 958

नंबर 958किताब 9, नंबर 152
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الْحَارِثِ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ يَوْمُ الْحَجِّ الأَكْبَرِ يَوْمُ النَّحْرِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَلَمْ يَرْفَعْهُ وَهَذَا أَصَحُّ مِنَ الْحَدِيثِ الأَوَّلِ وَرِوَايَةُ ابْنِ عُيَيْنَةَ مَوْقُوفًا أَصَحُّ مِنْ رِوَايَةِ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ مَرْفُوعًا ‏.‏ هَكَذَا رَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ مِنَ الْحُفَّاظِ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنِ الْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ مَوْقُوفًا ‏.‏ وَقَدْ رَوَى شُعْبَةُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ قَالَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُرَّةَ عَنِ الْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ مَوْقُوفًا ‏.‏
Ali narrated:"They day of Al-Hajj Al-Akbar is the Day of An-Nahr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।