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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 949

नंबर 949किताब 9, नंबर 143
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حُمَيْدٍ، سَمِعَ السَّائِبَ بْنَ يَزِيدَ، عَنِ الْعَلاَءِ بْنِ الْحَضْرَمِيِّ يَعْنِي مَرْفُوعًا، قَالَ ‏ "‏ يَمْكُثُ الْمُهَاجِرُ بَعْدَ قَضَاءِ نُسُكِهِ بِمَكَّةَ ثَلاَثًا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ هَذَا الْوَجْهِ بِهَذَا الإِسْنَادِ مَرْفُوعًا ‏.‏
Al-Ala bin Al-Hadrami narrated :(that the Prophet said): "The Muhajir may stay for three (days) in Makkah after carrying out his rites
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।