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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 927

नंबर 927किताब 9, नंबर 120
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ الْوَاسِطِيُّ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ نُمَيْرٍ، عَنْ أَشْعَثَ بْنِ سَوَّارٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ كُنَّا إِذَا حَجَجْنَا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَكُنَّا نُلَبِّي عَنِ النِّسَاءِ وَنَرْمِي عَنِ الصِّبْيَانِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏ وَقَدْ أَجْمَعَ أَهْلُ الْعِلْمِ عَلَى أَنَّ الْمَرْأَةَ لاَ يُلَبِّي عَنْهَا غَيْرُهَا بَلْ هِيَ تُلَبِّي عَنْ نَفْسِهَا وَيُكْرَهُ لَهَا رَفْعُ الصَّوْتِ بِالتَّلْبِيَةِ ‏.‏
Jabir narrated:"When we performed our Hajj with the Prophet we would say the Talbiyah for the women and we would stone for the boys
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।