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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 887

नंबर 887किताब 9, नंबर 80
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ ابْنَ عُمَرَ، صَلَّى بِجَمْعٍ فَجَمَعَ بَيْنَ الصَّلاَتَيْنِ بِإِقَامَةٍ وَقَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَعَلَ مِثْلَ هَذَا فِي هَذَا الْمَكَانِ ‏.‏
Abdullah bin Malik narrated:"Ibn Umar prayed at Jam (Muzdalifah), so he combined two prayers with the Iqamah, and he said: 'I saw the Messenger of Allah doing the same as this at the place
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।