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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 863

नंबर 863किताब 9, नंबर 56
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ إِنَّمَا سَعَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالْبَيْتِ وَبَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ لِيُرِيَ الْمُشْرِكِينَ قُوَّتَهُ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ عَائِشَةَ وَابْنِ عُمَرَ وَجَابِرٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَهُوَ الَّذِي يَسْتَحِبُّهُ أَهْلُ الْعِلْمِ أَنْ يَسْعَى بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ ‏.‏ فَإِنْ لَمْ يَسْعَ وَمَشَى بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ رَأَوْهُ جَائِزًا ‏.‏
Ibn Abbas narrated:"The Messenger of Allah only performed the Sa'i of the House and of As-Safa and Al-Marwah to show his strength to the idolaters
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।