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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 855

नंबर 855किताब 9, नंबर 48
حَدَّثَنَا يُوسُفُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي قَزَعَةَ الْبَاهِلِيِّ، عَنِ الْمُهَاجِرِ الْمَكِّيِّ، قَالَ سُئِلَ جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَيَرْفَعُ الرَّجُلُ يَدَيْهِ إِذَا رَأَى الْبَيْتَ فَقَالَ حَجَجْنَا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَفَكُنَّا نَفْعَلُهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى رَفْعُ الْيَدَيْنِ عِنْدَ رُؤْيَةِ الْبَيْتِ إِنَّمَا نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ شُعْبَةَ عَنْ أَبِي قَزَعَةَ ‏.‏ وَأَبُو قَزَعَةَ اسْمُهُ سُوَيْدُ بْنُ حُجَيْرٍ ‏.‏
Al-Muhajir Al-Makki said:Jabir bin Abdulla was asked about a man raising his hands when he sees the House (Ka'bah). So he said: 'We performed Hajj with the Messenger of Allah and we did it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।