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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 815.2

नंबर 815.2किताब 9, नंबर 8
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا حَبَّانُ بْنُ هِلاَلٍ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، قَالَ قُلْتُ لأَنَسِ بْنِ مَالِكٍ كَمْ حَجَّ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم قَالَ حَجَّةٌ وَاحِدَةٌ وَاعْتَمَرَ أَرْبَعَ عُمَرٍ عُمْرَةٌ فِي ذِي الْقَعْدَةِ وَعُمْرَةُ الْحُدَيْبِيَةِ وَعُمْرَةٌ مَعَ حَجَّتِهِ وَعُمْرَةُ الْجِعِرَّانَةِ إِذْ قَسَّمَ غَنِيمَةَ حُنَيْنٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَحَبَّانُ بْنُ هِلاَلٍ هُوَ أَبُو حَبِيبٍ الْبَصْرِيُّ هُوَ جَلِيلٌ ثِقَةٌ وَثَّقَهُ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ ‏.‏
Qatadah narrated:"I said to Anas bin Malik: 'How many times did the Prophet perform Hajj?' He said: 'He performed one Hajj and he performed four Umrah: An Umrah during Dhul-Qa'dah; the Umrah of Al-Hudaibiyah, and Umrah with his Hajj, and an Umrah from Al-Ji'irranah when he divided up the war spoils of Hunain

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।