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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 681

नंबर 681किताब 7, नंबर 65
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا وَكِيِعٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ الْمَسْأَلَةَ كَدٌّ يَكُدُّ بِهَا الرَّجُلُ وَجْهَهُ إِلاَّ أَنْ يَسْأَلَ الرَّجُلُ سُلْطَانًا أَوْ فِي أَمْرٍ لاَ بُدَّ مِنْهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Samurah bin Jundub narrated that :the Messenger of Allah said: "Asking is a labor that toils on a man's face, except if a man asks for something from the Sultan (ruler), or he asks for something that he cannot do without
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book on Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।