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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 640

नंबर 640किताब 7, नंबर 24
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْحَسَنِ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي مَرْيَمَ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، حَدَّثَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ سَنَّ فِيمَا سَقَتِ السَّمَاءُ وَالْعُيُونُ أَوْ كَانَ عَثَرِيًّا الْعُشْرُ وَفِيمَا سُقِيَ بِالنَّضْحِ نِصْفُ الْعُشْرِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Salim narrated from his father that :the Messenger of Allah instituted the Ushr of what was watered by the heavens and steams, or through natural channels, and half of the Ushr for what is watered by irrigation
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book on Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।