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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 634

नंबर 634किताब 7, नंबर 18
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ قَابُوسَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ نَحْوَهُ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ سَعِيدِ بْنِ زَيْدٍ، وَجَدِّ حَرْبِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ الثَّقَفِيِّ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ قَدْ رُوِيَ عَنْ قَابُوسِ بْنِ أَبِي ظَبْيَانَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مُرْسَلاً ‏.‏ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ عَامَّةِ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنَّ النَّصْرَانِيَّ إِذَا أَسْلَمَ وُضِعَتْ عَنْهُ جِزْيَةُ رَقَبَتِهِ ‏.‏ وَقَوْلُ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لَيْسَ عَلَى الْمُسْلِمِينَ عُشُورٌ ‏"‏ إِنَّمَا يَعْنِي بِهِ جِزْيَةَ الرَّقَبَةِ وَفِي الْحَدِيثِ مَا يُفَسِّرُ هَذَا حَيْثُ قَالَ ‏"‏ إِنَّمَا الْعُشُورُ عَلَى الْيَهُودِ وَالنَّصَارَى وَلَيْسَ عَلَى الْمُسْلِمِينَ عُشُورٌ ‏"‏ ‏.‏
Ibn Abbas narrated:(A similar narration as no)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book on Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।