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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 631

नंबर 631किताब 7, नंबर 15
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ صَالِحٍ الطَّلْحِيُّ الْمَدَنِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنِ اسْتَفَادَ مَالاً فَلاَ زَكَاةَ عَلَيْهِ حَتَّى يَحُولَ عَلَيْهِ الْحَوْلُ عِنْدَ رَبِّهِ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ سَرَّاءَ بِنْتِ نَبْهَانَ الْغَنَوِيَّةِ ‏.‏
Ibn Umar narrated that :the Messenger of Allah said: "Whoever acquired wealth, then there is no Zakat on it until the Hawl has passed (while it is in his possession)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book on Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।