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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 622

नंबर 622किताब 7, नंबर 6
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْمُحَارِبِيُّ، وَأَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ السَّلاَمِ بْنُ حَرْبٍ، عَنْ خُصَيْفٍ، عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ فِي ثَلاَثِينَ مِنَ الْبَقَرِ تَبِيعٌ أَوْ تَبِيعَةٌ وَفِي أَرْبَعِينَ مُسِنَّةٌ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَكَذَا رَوَاهُ عَبْدُ السَّلاَمِ بْنُ حَرْبٍ عَنْ خُصَيْفٍ وَعَبْدُ السَّلاَمِ ثِقَةٌ حَافِظٌ ‏.‏ وَرَوَى شَرِيكٌ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ خُصَيْفٍ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ عَنْ أُمِّهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ‏.‏ وَأَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ لَمْ يَسْمَعْ مِنْ عَبْدِ اللَّهِ ‏.‏
Abdullah bin Mas'ud narrated that :the Prophet said: "A Tabi or a Tabi'ah (is due) on thirty cows, and a Musinnah (is due) on every forty
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book on Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।