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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 612

नंबर 612किताब 6, नंबर 69
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حُمَيْدٍ الرَّازِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا نُعَيْمُ بْنُ مَيْسَرَةَ النَّحْوِيُّ، عَنْ خَالِدِ بْنِ زِيَادٍ، نَحْوَهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ مِثْلَ هَذَا إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ مُقَاتِلِ بْنِ حَيَّانَ عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ ‏.‏
Shahr bin Hawshab said:(Another chain) from Khalid bin Ziyad with similar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book on Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।