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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 587

नंबर 587किताब 6, नंबर 44
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، وَغَيْرُ، وَاحِدٍ، قَالُوا حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَعِيدِ بْنِ أَبِي هِنْدٍ، عَنْ ثَوْرِ بْنِ زَيْدٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَلْحَظُ فِي الصَّلاَةِ يَمِينًا وَشِمَالاً وَلاَ يَلْوِي عُنُقَهُ خَلْفَ ظَهْرِهِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَقَدْ خَالَفَ وَكِيعٌ الْفَضْلَ بْنَ مُوسَى فِي رِوَايَتِهِ ‏.‏
Ibn Abbas narrated:"The Messenger of Allah would glance toward the right and the left during Salat but he would not turn his neck to look behind him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book on Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।