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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 584

नंबर 584किताब 6, नंबर 41
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ، أَخْبَرَنَا خَالِدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنِي غَالِبٌ الْقَطَّانُ، عَنْ بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْمُزَنِيِّ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كُنَّا إِذَا صَلَّيْنَا خَلْفَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِالظَّهَائِرِ سَجَدْنَا عَلَى ثِيَابِنَا اتِّقَاءَ الْحَرِّ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ وَابْنِ عَبَّاسٍ ‏.‏ وَقَدْ رَوَى وَكِيعٌ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ خَالِدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ ‏.‏
Anas bin Malik narrated:"When we prayed behind the Prophet in the midday heat, we would prostrate on our garments as a protection against the heat
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book on Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।