सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 551

नंबर 551किताब 6, नंबर 8
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنِ الْحَجَّاجِ، عَنْ عَطِيَّةَ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ صَلَّيْتُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم الظُّهْرَ فِي السَّفَرِ رَكْعَتَيْنِ وَبَعْدَهَا رَكْعَتَيْنِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏ وَقَدْ رَوَاهُ ابْنُ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَطِيَّةَ وَنَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ ‏.‏
Ibn Umar narrated:"I prayed Zuhr with the Prophet on a journey as two Rak'ah, and two Rak'ah after it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book on Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।