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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 546

नंबर 546किताब 6, नंबर 3
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، وَإِبْرَاهِيمَ بْنِ مَيْسَرَةَ، سَمِعَا أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ، قَالَ صَلَّيْنَا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم الظُّهْرَ بِالْمَدِينَةِ أَرْبَعًا وَبِذِي الْحُلَيْفَةِ الْعَصْرَ رَكْعَتَيْنِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Anas bin Malik narrated:"We prayed Zuhr as four with the Prophet in Al-Madinah, and Asr as two Rak'ah in Dhil-Hulaifah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book on Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।