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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 532

नंबर 532किताब 5, नंबर 3
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ صَلَّيْتُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم الْعِيدَيْنِ غَيْرَ مَرَّةٍ وَلاَ مَرَّتَيْنِ بِغَيْرِ أَذَانٍ وَلاَ إِقَامَةٍ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ وَابْنِ عَبَّاسٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَالْعَمَلُ عَلَيْهِ عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَغَيْرِهِمْ أَنَّهُ لاَ يُؤَذَّنُ لِصَلاَةِ الْعِيدَيْنِ وَلاَ لِشَيْءٍ مِنَ النَّوَافِلِ ‏.‏
Jabir bin Samurah narrated:"I prayed the two Eid prayers with the Prophet - not one time, not two times - without and Adhan nor an Iqamah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book on the Two Eids

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।