सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3934

नंबर 3934किताब 49, नंबर 334
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي زِيَادٍ الْقَطَوَانِيُّ، وَغَيْرُ، وَاحِدٍ، قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ الطَّيَالِسِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا عِمْرَانُ الْقَطَّانُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم نَظَرَ قِبَلَ الْيَمَنِ فَقَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ أَقْبِلْ بِقُلُوبِهِمْ وَبَارِكْ لَنَا فِي صَاعِنَا وَمُدِّنَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ عِمْرَانَ الْقَطَّانِ ‏.‏
Narrated Zaid bin Thabit [may Allah be pleased with him]:that the Prophet (ﷺ) looked towards Yemen and said: "O Allah direct their hearts and bless us in our Sa' and our Mudd
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।