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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3903

नंबर 3903किताब 49, नंबर 303
حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْخُزَاعِيُّ الْبَصْرِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، وَعَبْدُ الصَّمَدِ، قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ ثَابِتٍ الْبُنَانِيُّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي طَلْحَةَ، قَالَ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اقْرَأْ قَوْمَكَ السَّلاَمَ فَإِنَّهُمْ مَا عَلِمْتُ أَعِفَّةٌ صُبُرٌ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated Abu Talhah:"The Messenger of Allah (ﷺ) said to me: 'Convey my Salam to your people, because I know them to be modest and patient
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।