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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3899

नंबर 3899किताब 49, नंबर 299
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ، عَنْ زُهَيْرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ابْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ، عَنِ الطُّفَيْلِ بْنِ أُبَىِّ بْنِ كَعْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لَوْلاَ الْهِجْرَةُ لَكُنْتُ امْرَأً مِنَ الأَنْصَارِ ‏"‏ ‏.‏ وَبِهَذَا الإِسْنَادِ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ لَوْ سَلَكَ النَّاسُ وَادِيًا أَوْ شِعْبًا لَكُنْتُ مَعَ الأَنْصَارِ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏
Narrated Ubayy bin Ka'b:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "If it were not for the Hijrah, I would be a man from the Ansar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।