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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3866

नंबर 3866किताब 49, नंबर 266
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، مُحَمَّدُ بْنُ نَافِعٍ قَالَ حَدَّثَنَا النَّضْرُ بْنُ حَمَّادٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سَيْفُ ابْنُ عُمَرَ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا رَأَيْتُمُ الَّذِينَ يَسُبُّونَ أَصْحَابِي فَقُولُوا لَعْنَةُ اللَّهِ عَلَى شَرِّكُمْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ مُنْكَرٌ لاَ نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏ وَالنَّضْرُ مَجْهُولٌ وَسَيْفٌ مَجْهُولٌ ‏.‏
Narrated Ibn 'Umar:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "If you see those who abuse my Companions, then say: 'May Allah's curse be upon the worst of you
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Very DaifAhmad Muhammad Shakir
  • Very DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।