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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3863

नंबर 3863किताब 49, नंबर 263
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَزْهَرُ السَّمَّانُ، عَنْ سُلَيْمَانَ التَّيْمِيِّ، عَنْ خِدَاشٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَيَدْخُلَنَّ الْجَنَّةَ مَنْ بَايَعَ تَحْتَ الشَّجَرَةِ إِلاَّ صَاحِبَ الْجَمَلِ الأَحْمَرِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated Abu Az-Zubair:from Jabir, that the Prophet (ﷺ) said: "Those who gave the pledge under the tree shall enter Paradise, except for the owner of the red camel
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।