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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3855

नंबर 3855किताब 49, नंबर 255
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْكِنْدِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو يَحْيَى الْحِمَّانِيُّ، عَنْ بُرَيْدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِي مُوسَى، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يَا أَبَا مُوسَى لَقَدْ أُعْطِيتَ مِزْمَارًا مِنْ مَزَامِيرِ آلِ دَاوُدَ ‏"‏ ‏.‏هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ بُرَيْدَةَ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَأَنَسٍ ‏.‏
Narrated Abu Musa:that the Prophet (ﷺ) said: "O Abu Musa! You have been given a Mizmar among the Mazamir of the family of Dawud
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।