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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3832

नंबर 3832किताब 49, नंबर 232
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ حُبَابٍ، عَنْ مَيْمُونٍ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ، نَحْوَ حَدِيثِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ يَعْقُوبَ وَلَمْ يَذْكُرْ فِيهِ وَأَخَذَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَنْ جِبْرِيلَ ‏.‏
Narrated Thabit:from Anas, similar to the previous narration of Ibrahim bin Ya'qub, and he did not mention in it: "And the Prophet (ﷺ) took it from Jibra'il
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।