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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3830

नंबर 3830किताब 49, नंबर 230
حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ أَخْزَمَ الطَّائِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ جَابِرٍ، عَنْ أَبِي نَصْرٍ، عَنْ أَنَسٍ، رضى الله عنه قَالَ كَنَّانِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِبَقْلَةٍ كُنْتُ أَجْتَنِيهَا ‏. هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ مِنْ حَدِيثِ جَابِرٍ الْجُعْفِيِّ عَنْ أَبِي نَصْرٍ ‏.‏ وَأَبُو نَصْرٍ هُوَ خَيْثَمَةُ بْنُ أَبِي خَيْثَمَةَ الْبَصْرِيُّ رَوَى عَنْ أَنَسٍ أَحَادِيثَ ‏.‏
Narrated Anas [may Allah be pleased with him]:"The Messenger of Allah (ﷺ) gave me my Kunyah because of a plant that I used to care for
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।