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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3828

नंबर 3828किताब 49, नंबर 228
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ شَرِيكٍ، عَنْ عَاصِمٍ الأَحْوَلِ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ رُبَّمَا قَالَ لِيَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَا ذَا الأُذُنَيْنِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو أُسَامَةَ يَعْنِي يُمَازِحُهُ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:that the Prophet (ﷺ) said to him: "O possessor of two ears!" (One of the narrators) Abu Usamah said: 'He only meant it as a joke
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।