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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3820

नंबर 3820किताब 49, नंबर 220
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو الأَزْدِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا زَائِدَةُ، عَنْ بَيَانٍ، عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ مَا حَجَبَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مُنْذُ أَسْلَمْتُ وَلاَ رَآنِي إِلاَّ ضَحِكَ . هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Jarir bin 'Abdullah:"The Messenger of Allah (ﷺ) never screened me since I accepted Islam, nor did he look at me except that he laughed
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।