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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3818

नंबर 3818किताब 49, नंबर 218
حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى، عَنْ طَلْحَةَ بْنِ يَحْيَى، عَنْ عَائِشَةَ بِنْتِ طَلْحَةَ، عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ، قَالَتْ أَرَادَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُنَحِّيَ مُخَاطَ أُسَامَةَ قَالَتْ عَائِشَةُ دَعْنِي دَعْنِي حَتَّى أَكُونَ أَنَا الَّذِي أَفْعَلُ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ يَا عَائِشَةُ أَحِبِّيهِ فَإِنِّي أُحِبُّهُ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated 'Aishah, the Mother of the Believers:"The Prophet (ﷺ) wanted to wipe the running nose of Usamah." 'Aishah said: "Leave it to me so that I may be the one to do it." He said: "O 'Aishah, love him, for verily I love him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।