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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3814

नंबर 3814किताब 49, नंबर 214
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ مَا كُنَّا نَدْعُو زَيْدَ بْنَ حَارِثَةَ إِلاَّ زَيْدَ بْنَ مُحَمَّدٍ حَتَّى نَزَلَتْ ‏:‏ ‏(‏ ادعُوهُمْ لِأَبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِنْدَ اللَّهِ ‏)‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Ibn 'Umar:"We called Zaid bin Harithah nothing but 'Zaid bin Muhammad' until the Qur'an was revealed (ordering): Call them by their fathers, that is more just according to Allah. (33:)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।