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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3810

नंबर 3810किताब 49, नंबर 210
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ شَقِيقِ بْنِ سَلَمَةَ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ خُذُوا الْقُرْآنَ مِنْ أَرْبَعَةٍ مِنِ ابْنِ مَسْعُودٍ وَأُبَىِّ بْنِ كَعْبٍ وَمُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ وَسَالِمٍ مَوْلَى أَبِي حُذَيْفَةَ ‏"‏ ‏. هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated 'Abdullah bin 'Amr:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Take the Qur'an from four: From Ibn Mas'ud, Ubayy bin Ka'b, Mu'adh bin Jabal, and Salim the freed slave of Abu Hudhaifah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।