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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3808

नंबर 3808किताब 49, नंबर 208
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ أَخْبَرَنَا صَاعِدٌ الْحَرَّانِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، قَالَ حَدَّثَنَا مَنْصُورٌ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الْحَارِثِ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَوْ كُنْتُ مُؤَمِّرًا أَحَدًا مِنْ غَيْرِ مَشُورَةٍ مِنْهُمْ لأَمَّرْتُ عَلَيْهِمُ ابْنَ أُمِّ عَبْدٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ إِنَّمَا نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ الْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ ‏.‏
Narrated 'Ali:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "If I was going to appoint anyone of them as a leader without any consultation, I would appoint Ibn Umm 'Abd over them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।