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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3801

नंबर 3801किताब 49, नंबर 201
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عُمَيْرٍ، هُوَ أَبُو الْيَقْظَانِ عَنْ أَبِي حَرْبِ بْنِ أَبِي الأَسْوَدِ الدِّيلِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَا أَظَلَّتِ الْخَضْرَاءُ وَلاَ أَقَلَّتِ الْغَبْرَاءُ أَصْدَقَ مِنْ أَبِي ذَرٍّ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ وَأَبِي ذَرٍّ ‏.‏ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏
Narrated 'Abdullah bin 'Amr:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "There is no one more truthful, that the sky has shaded and the earth has carried, than Abu Dharr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।