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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3797

नंबर 3797किताब 49, नंबर 196
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ وَكِيعٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي، عَنِ الْحَسَنِ بْنِ صَالِحٍ، عَنْ أَبِي رَبِيعَةَ الإِيَادِيِّ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ الْجَنَّةَ تَشْتَاقُ إِلَى ثَلاَثَةٍ عَلِيٍّ وَعَمَّارٍ وَسَلْمَانَ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ الْحَسَنِ بْنِ صَالِحٍ ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: 'Indeed, Paradise longs for three: 'Ali, 'Ammar, and Salman
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।