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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3789

नंबर 3789किताब 49, नंबर 188
حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، سُلَيْمَانُ بْنُ الأَشْعَثِ قَالَ أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ مَعِينٍ، قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ يُوسُفَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سُلَيْمَانَ النَّوْفَلِيِّ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيِّ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَحِبُّوا اللَّهَ لِمَا يَغْذُوكُمْ مِنْ نِعَمِهِ وَأَحِبُّونِي بِحُبِّ اللَّهِ وَأَحِبُّوا أَهْلَ بَيْتِي لِحُبِّي ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا ��َدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ إِنَّمَا نَعْرِفُهُ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Narrated Ibn 'Abbas:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Love Allah for what He nourishes you with of His Blessings, love me due to the love of Allah, and love the people of my house due to love of me
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।